हिन्दू ट्रक ड्राइवर ने बचाई थी मुस्लिम लड़की की इज्जत, लेकिन जब लड़की को पता चला तो उसने..

हिन्दू ट्रक ड्राइवर ने बचाई थी मुस्लिम लड़की की इज्जत, लेकिन जब लड़की को पता चला तो उसने..

ये कहावत तो आपने सुनी ही होगी कि “जिसका कोई नहीं होता, उसका खुदा होता है”. मुसीबत में पड़ने पर लोग अक्सर भगवान को ही याद करते हैं और यदि फरियाद दिल से की जाए तो भगवान उसे बचाने के लिए कोई न कोई फ़रिश्ता भी जरूर भेज देते हैं. आज हम आपको मुरारी की कहानी सुनाने जा रहे हैं जो उत्तरप्रदेश के साहरंगपुर का रहने वाला था. मुरारी की पत्नी और बच्चों की 4 साल पहले एक दुर्घटना में मौत हो गयी थी.

मुरारी पेशे से एक ट्रक ड्राइवर था. वह देश के अलग-अलग जगहों पर ट्रक लेकर जाता था और ढाबों पर रोटी खाकर अपना टाइम गुजारा करता था. यही मुरारी की जिंदगी थी. भक्ति भावना में लीन रहने वाला मुरारी एक सज्जन किस्म का व्यक्ति था. एक दिन जब मुरारी अपने ट्रक से दिल्ली जा रहा था तब इटावा मैनपुरी के बीच उसकी नजर एक कार पर पड़ी. यह कार एकदम सुनसान जगह पर खड़ी थी. ऐसे में मुरारी को अंदाजा हो गया कि कुछ तो गड़बड़ है. मुरारी ने ध्यान से सुना तो उसे एक लड़की की आवाज़ सुनाई दी जो जोर-जोर से रो रही थी. लड़की के रोने की आवाज़ सुनकर मुरारी ट्रक के कंडक्टर घनश्याम के साथ उस कार के पास पहुंचा.

जब मुरारी ने कार के पास पहुंचकर आवाज़ लगाई तो कर से दो-तीन लड़के निकले और वह मुरारी को मारने-पीटने लगे. लेकिन मुरारी ने भी हार नहीं मानी और कंडक्टर घनश्याम के साथ मिलकर उन लड़कों से जम कर दो-दो हाथ किये, और इतनी धूल चटाई कि वह वहां से भागने पर मजबूर हो गए. इस दौरान मुरारी को भी काफी चोट लगी. बाद में जब मुरारी ने गाड़ी के अंदर झांका तो देखा कि एक लड़की के कपड़े जगह-जगह से फटे हुए हैं और वह काफी डरी हुई है. यह देखकर मुरारी ने लड़की को सांत्वना दी और अपनी ट्रक से एक चादर मंगवाकर लड़की के ऊपर डाला. मुरारी और कंडक्टर मिलकर लड़की को अस्पताल ले गए और उसका इलाज करवाया.

बता दें, मुरारी ने जिस लड़की की इज्जत बचायी थी उसका नाम आबिदा हुसैन था. आबिदा फतेहाबाद की रहने वाली थी. आबिदा भी मुरारी की तरह बेसहारा थी और उसके भी माता-पिता नहीं थे. आबिदा पेशे से एक शिक्षिका थी, जिसकी अभी शादी नहीं हुई थी. जब मुरारी के बारे में आबिदा को पता चला तो उसकी आंखों में आंसू आ गए और उसने बड़े भाई/पिता के तौर पर मुरारी को अपने घर में ही रख लिया. आबिदा ने इस कहानी को अपनी शादी के दिन यानी 11 सितंबर 2019 को सभी के साथ शेयर किया. आज मुरारी को एक बेटी और एक दामाद मिल गया है. तीनों एक साथ एक ही घर में रहते हैं. आबिदा भी मुरारी को अपने पिता के रूप में पाकर बहुत खुश है.

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