अगर हम बंदर से इंसान बने हैं तो बाकी बंदर इंसान क्यों नहीं बने ?

अगर हम बंदर से इंसान बने हैं तो बाकी बंदर इंसान क्यों नहीं बने ?

इसका कारण है उत्परिवर्तन अर्थात बदलाव

आइए सामान्य भाषा में इसको समझते हैं

मान लीजिए कोई औरत है जिसको एक बच्चा हुआ जिसकी नाक थोड़ी सी लंबी है।अब उस बच्चे की शादी कर दी गई तो उसका जो बच्चा हुआ उसकी नाक थोड़ी और लंबी हो गई उस बच्चे की भी शादी हुई , उसका भी जो बच्चा हुआ उसकी नाक और लंबी हुई इस तरह से पहले वाले बच्चे की तुलना में आखरी वाले बच्चे की नाक बहुत लंबी हुई । इसे ही उत्परिवर्तन या बदलाव कहते हैं।

अब आइए जानते हैं विज्ञान की भाषा में कि किस तरह से बंदर इंसान में परिवर्तित हुए और कुछ बंदर ही रह गए

सबसे पहले जो जीव का विकास हुआ वह एक कोशिकीय था उसके बाद धीरे-धीरे उसमें बदलाव होते गए और वह बहुकोशिकीय बन गया यह पहला जीव एक जलीय जीव था वातावरण में परिवर्तन होने के साथ-साथ यह जीव जल से बाहर निकल कर आए और उनमें भी परिवर्तन होता गया इसके बाद धीरे-धीरे उन्होंने बंदर का रूप लिया।

यह बात ध्यान रखने योग्य है कि हमारा जो पहला पूर्वज था बंदर का वह आज के छछूंदर की तरह दिखाई देता है।

अब ऊपर वाली कहानी से समझिए जैसे एक बंदर था उसका एक बच्चा हुआ उस बच्चे में कुछ परिवर्तन हुआ इंसानों की तरह से जैसे बुद्धि का विकास

और यह लक्षण उसके डीएनए को परिवर्तित कर दिया । डीएनए में परिवर्तन के बाद उस बंदर के वंश में कुछ परिवर्तन होता चला गया। और कुछ बंदर वैसे के वैसे ही रह गए। इस तरह से आज के मानव का और बंदरों का विकास हुआ।

दरअसल में जो बंदर बेवकूफ थे, जिनका धीरे-धीरे प्रकृति से मोह भंग होता चला गया, उनहोंने तो इनसान का रूप धारण करना शुरू कर दिया। और जो पीछे समझदार बंदर बच गये थे वो काफी समय तक उन इनसानों की गतिविधियां नोट करते गये। उन्होंने देखा कि ये सारे हमारे भाई उछलना, कूदना तो भूल चुके हैं, पृथ्वी पर आने वाली आपदाओं से तो निजात पा नहीं सके, धरती पर तो आधी से ज्यादा आबादी इनकी बेघर है और चांद व मंगल ग्रह पर बस्तियां बनाने के ख्वाब ले रहे हैं। ऐसी ही कुछ और गतिविधियां देखने के बाद उन बाकी के बचे हुए बंदरों ने विभिन्मन महा पंचायत व खाप पंचायतों में आखिरकार यह फैसला लिया कि हमने इनसान का रूप नहीं लेना।

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