स्क्रेपेज पॉलिसी से 1 लाख रुपये तक सस्ती हो सकती हैं नई गाड़ियां, जानिए कैसे

स्क्रेपेज पॉलिसी से 1 लाख रुपये तक सस्ती हो सकती हैं नई गाड़ियां, जानिए कैसे

भारत सरकार ने नई स्क्रेपेज पॉलिसी तैयार की है. यह पॉलिसी पुरानी गाड़ियों के लिए है. इस पॉलिसी में फिटनेस और स्क्रेपेज से जुड़े नियम बताए गए हैं. इस पॉलिसी के चलते नई गाड़ियों के दाम गिरेंगे और रजिस्ट्रेशन फीस भी कम होगी. इस पॉलिसी के तहत अगले साल 1 अक्टूबर से 15 साल पुरानी गाड़ियों को स्क्रेप (कबाड़) में डालने के नियम लागू हो जाएंगे. बाद में धीरे-धीरे अलग-अलग चरणों में इस पॉलिसी को पूरे देश में लागू किया जाएगा.

इसके लिए गाड़ियों की फिटनेस टेस्ट करानी होगी. यह नियम पुरानी गाड़ियों के लिए लागू होगा क्योंकि गाड़ी नई है तो स्क्रेपेज पॉलिसी के तहत फिटनेस टेस्ट कराने की जरूरत नहीं है. अगर गाड़ी 15 साल से पुरानी हो गई है तो उसका फिटनेस सर्टिफिकेट लेना पड़ेगा. इसके लिए देश में अलग-अलग जगहों पर फिटनेस सेंटर बनाए जाएंगे. फिटनेस टेस्ट में जो गाड़ी पास हो जाएगी, उसके लिए दुबारा रजिस्ट्रेशन कराना होगा. लेकिन री-रजिस्ट्रेशन की फीस अभी के मुकाबले 10 गुना तक ज्यादा देनी होगी. अगर गाड़ी फिटनेस टेस्ट में पास नहीं होती तो उसे स्क्रेप कराना होगा.

कैसे घटेंगे नई गाड़ियों के दाम

जहां गाड़ियों की स्क्रेपिंग होगी, उसके लिए सरकार देश के अलग-अलग जगहों पर स्क्रेपिंग सेंटर की घोषणा कर रही है. सरकार इसके लिए डिजिटल ऐप बना रही है जिसमें सेंटर से लेकर स्क्रेपिंग की पूरी जानकारी दी जाएगी. इसी ऐप पर आपको अपनी गाड़ी का स्क्रेपिंग सर्टिफिकेट अपलोड करना होगा. जब अगली बार नई गाड़ी खरीदने जाएंगे तो इस सर्टिफिकेट के आधार पर गाड़ी के दाम में छूट दी जाएगी. इसमें रजिस्ट्रेशन फीस पूरी तरह से माफ कर दी जाएगी. अगर गाड़ी प्राइवेट है तो रोड टैक्स में 25 परसेंट की कमी की जाएगी.

कॉमर्शियल गाड़ी है तो उसके रोड टैक्स में 15 परसेंट की छूट दी जाएगी. गाड़ी के कबाड़ (स्क्रेप) की कीमत नई गाड़ी के एक्स शोरूम दाम का 4-6 परसेंट होगा. इसके अलावा सरकार ने कार कंपनियों से कहा है कि ग्राहकों को अपने स्तर पर 5 परसेंट तक की छूट दी जाए. सबको जोड़ दें तो ग्राहक को बंपर फायदा मिल सकता है. साथ में प्रदूषण को रोकने में भी मदद मिलेगी.

देश में 1 करोड़ पुरानी गाड़ियां

एक आंकड़े के मुताबिक देश भर में लगभग 1 करोड़ गाड़ियां ऐसी हैं जो अनफिट हैं और उनका रजिस्ट्रेशन खत्म हो चुका है. इन 1 करोड़ गाड़ियों को सड़क से हटाया जाए तो 15-20 परसेंट तक प्रदूषण में कमी आएगी. नई गाड़ियों पर पुरानी गाड़ियों के मुकाबले एक साल में 1 लाख रुपये से ज्यादा बचत हो सकती है क्योंकि नई गाड़ियों में तेल कम लगता है. रखरखाव का खर्च भी कम होता है. इसके अलावा पुरानी गाड़ी को स्क्रेप में देने के बाद नई गाड़ी लेने जाते हैं तो लगभग 1.15 लाख रुपये की बचत होगी जो रजिस्ट्रेशन फीस, रोड टैक्स और स्क्रेप के तौर पर मिलेगी. किसी गाड़ी पर 5 साल का बचत देखें तो 8 लाख के आसपास होगी. स्क्रेप का कच्चा माल स्टील और ऑटोमोबिल उद्योग में काम आएगा. पुरानी गाड़ियों से मिले कच्चे माल के चलते नई गाड़ियों का प्रोडक्शन कॉस्ट 30 परसेंट तक घट सकता है.

23 हजार करोड़ रुपये के स्क्रेप मेटल का आयात

एक आंकड़े की मानें तो भारत में 23 हजार करोड़ रुपये के स्क्रेप मेटल का आयात होता है. यह आयात ऑटो सेक्टर में नई गाड़ियों के निर्माण के लिए होता है. ऐसे आयात इसलिए करने होते हैं क्योंकि देश में अभी तक स्क्रेप मेटल का कोई सिस्टम नहीं है. नई स्क्रेप पॉलिसी से देश में ही कच्चा माल मिल सकेगा और इससे स्क्रेप मेटल के आयात पर रोक लगेगी. इस दिशा में तेजी से कदम आगे बढ़ाने के लिए स्क्रेपिंग के क्षेत्र में 10 हजार करोड़ रुपये की निवेश नीति बनाने की बात कही गई है.

15 साल पुरानी गाड़ियां होंगी बाहर

इस नीति के तहत देश में चल रहे कबाड़ के अनौपचारिक उद्योग को औपचारिक काम में तब्दील किया जाएगा. गाड़ियों को कबाड़ में बदलने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्टैडर्ड तय किए जा रहे हैं. इस पूरी पद्धति को वैज्ञानिक आधार पर लागू किया जाएगा ताकि कबाड़ से काम की चीजें निकाली जा सकें. जैसा कि स्क्रेपेज पॉलिसी का ऐलान करते हुए प्रधानमंत्री ने कबाड़ से कंचन (कंचन) निकालने की बता कही, उसी दिशा में इस पॉलिसी को आगे बढ़ाया जा रहा है. प्रदूषण के स्तर और अंतरराष्ट्रीय मानकों को देखते हुए गाड़ियों की उम्र 15 साल तय की गई है. 15 साल पुरानी गाड़ियों को स्क्रेपेज में भेजने का नियम बनाया गया है.

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